अमां हाँ ! अबकी पहली अगस्त को जब कैलेण्डर पलटा था मन में देश के स्वतंत्रता दिवस मनाने का ख़्याल आते ही प्रफुल्लित हो गया लेकिन अगले ही पल जब ध्यान से कैलेंडर देखा तो सारा मज़ा किरकिरा हो गया! और पाया कि क्या खूब दिन पड़ा 15 अगस्त अबकी बार !! जी हाँ, अब तक तो आप भी अपना कैलेंडर देख चुके होंगे और यह भी पता चल चुका होगा कि अबकी 15 अगस्त इतवार अर्थात सन्डे को पड़ रहा है. अरे ! क्या बिगड़ जाता जो शनिवार या सोमवार को पड़ जाता ! कम-अज़-कम दो दिन तो छुट्टी के मिल जाते! वैसे भी प्राइवेट सेक्टर में छुट्टियाँ मिलती ही कहाँ है? और ऊपर से जो श्योर शोट छुट्टी एक थी भी तो उसे सन्डे निगल गया.और अब अगली बार 15 अगस्त इतवार को कब पडेगा, मालूम है आपको !? सन 2021 को !!!!!!!!
ख़ैर, कर क्या सकते है? वैसे एक खुश ख़बरी मैं आपको अभी से बता दूं कि अगले साल 15 अगस्त सोमवार को पडेगा...
तो ये तो वही बात हुई...
दिल को खुश रखने को ग़ालिब ये ख़्याल अच्छा है !!

23 पाठकों ने अपने विचार व्यक्त किये:
अमा सलीम साहब आप ने ठीक फ़रमाया है दोस्त...
हा हा हा...
और क्या उमीद कर सकते है आप से ???
१५ AUG आप के लिए तो.. छुट्टी का ही दिन होगा ना ....
;)
और क्या उमीद कर सकते है आप से ???
१५ AUG आप के लिए तो.. छुट्टी का ही दिन होगा ना ....
;)
यह सलीम खां ने लिखा है इस्लिये विवादित हो गया .वैसे सब के मन मे यह दुख जरुर है
सिंह साहब .. SUBJECT क्या है .. देखेये..
..15 AUGUST क्या ख़ाक मनाएंगे स्वतन्त्रता दिवस
इन का मतलब है यह है.. की अभी यह नाही मनाएंगे ??? सही कहाँ ना में ने?
अगर EID होती सन्डे को तो यही लिखेते क्या ?
..EID क्या ख़ाक मनाएंगे ???
जवाब की प्रतीक्षा है .....
भाई वाह क्या बात है, झण्डे गाड़ रखे हैं हैट्स ऑफ़ यू
achchhi jankari
adbhut jankari dusre paragraph men
धीरू सिंह जी ने समझा मेरा दर्द !!!
baat to sahi hai. inshallah agle saal somvaar ke din padega, itminaan rakhen!
tu kya 15 august manayega. tu to vande matrm ko hi nahi manta
@बेनामी sahab, (zara samne to aa o chhaliye !)
वन्दे मातरम को ज़बरन गंवाना क्या वास्तव में सही है? अगर कुछ ऐसा करने अथवा करवाने से किसी के अस्तित्व का प्रश्न खड़ा हो जाये तो क्या ये वाकई सही है. मैं तो इसे साजिशन बहुसंख्यक द्वारा मुसलमानों के अस्तित्व और नीवं पर प्रहार के बराबर मानता हूँ. कैसे ? आईये देखते हैं, कैसे!?
मसलन मिथिलेश दूबे और मैं घनिष्ठ मित्र हैं, यानि एक हिन्दू और और दुसरा मुस्लिम ! मैंने अर्थात सलीम ने मिथिलेश दूबे को अपने घर पर दावत पर बुलाया और मिथिलेश दुबे के लिए बकरे और मुर्गे के गोश्त का क्रमशः कोरमा और बिरयानी बनवाई. मिथिलेश दूबे नियत समय पर मेरे घर आते हैं, सलीम उनको नाश्ता पानी करवाता है और खाने के वक़्त वही कोरमा और बिरयानी परोसता है.
मिथिलेश दूबे ये सब देख कर थोडा विचलित होते हैं और आखिरकार कहते हैं कि "सलीम भाई ! मैं शाकाहारी हूँ!!!" सलीम कहते हैं कि "तो!!!!!!!?????" "भाई, शाकाहारी का मतलब मैं यह सब नहीं खा सकता, इसके खाने से मेरा धर्म नष्ट हो जाएगा और मैं हिन्दू हूँ और मांसाहार मैं नहीं ग्रहण कर सकता.
सलीम कहते हैं "भई! ये तो गलत है, आप को तो खाना ही पड़ेगा!"
निथिलेश "ये संभव नहीं है!"
सलीम "नहीं आप मेरे घर पर आये हैं और यहाँ मेरी ही मर्ज़ी चलेगी, आखिर हम सब मुस्लिम तो मांसाहारी हैं तो आखिर आप क्यूँ नहीं खा सकते"
मिथिलेश "सलीम भाए, मैं आपको कैसे समझाऊं"
सलीम "नहीं नहीं आपको तो खाना ही पड़ेगा"
अब मिथिलेश थोडा उखड़े "सलीम मैं सौ जमा भूखा रह सकता हूँ मगर मैं मांसाहार नहीं सकता, समझे आप कि नहीं"
सलीम "आपको खाना ही पड़ेगा, आप हमारी और हमारे जैसे करोणों मुस्लिम लोगों की भावनाओं का मजाक उड़ा रहे हैं और वो भी मेरे दोस्त होकर..."
और अंत में सलीम और मिथिलेश की लड़ाए हो जाती है और भूखे पेट ही मिथिलेश को वापिस आना पड़ता है.
दूसरा विकल्प:
सलीम को चाहिए कि वह कुछ ऐसी चीज़ लेकर आये जिससे वो दोनों ही बड़े मज़े से खाते और अपनी दोस्ती को बरक़रार रखते !!
आपका क्या कहना है "दोनों में से कौन सा विकल्प अपनाना चाहिए, सलीम को ?
मसलन मिथिलेश दूबे और मैं घनिष्ठ मित्र हैं, यानि एक हिन्दू और और दुसरा मुस्लिम ! मैंने अर्थात सलीम ने मिथिलेश दूबे को अपने घर पर दावत पर बुलाया और मिथिलेश दुबे के लिए बकरे और मुर्गे के गोश्त का क्रमशः कोरमा और बिरयानी बनवाई. मिथिलेश दूबे नियत समय पर मेरे घर आते हैं, सलीम उनको नाश्ता पानी करवाता है और खाने के वक़्त वही कोरमा और बिरयानी परोसता है.
मिथिलेश दूबे ये सब देख कर थोडा विचलित होते हैं और आखिरकार कहते हैं कि "सलीम भाई ! मैं शाकाहारी हूँ!!!" सलीम कहते हैं कि "तो!!!!!!!?????" "भाई, शाकाहारी का मतलब मैं यह सब नहीं खा सकता, इसके खाने से मेरा धर्म नष्ट हो जाएगा और मैं हिन्दू हूँ और मांसाहार मैं नहीं ग्रहण कर सकता.
सलीम कहते हैं "भई! ये तो गलत है, आप को तो खाना ही पड़ेगा!"
निथिलेश "ये संभव नहीं है!"
सलीम "नहीं आप मेरे घर पर आये हैं और यहाँ मेरी ही मर्ज़ी चलेगी, आखिर हम सब मुस्लिम तो मांसाहारी हैं तो आखिर आप क्यूँ नहीं खा सकते"
मिथिलेश "सलीम भाए, मैं आपको कैसे समझाऊं"
सलीम "नहीं नहीं आपको तो खाना ही पड़ेगा"
अब मिथिलेश थोडा उखड़े "सलीम मैं सौ जमा भूखा रह सकता हूँ मगर मैं मांसाहार नहीं सकता, समझे आप कि नहीं"
सलीम "आपको खाना ही पड़ेगा, आप हमारी और हमारे जैसे करोणों मुस्लिम लोगों की भावनाओं का मजाक उड़ा रहे हैं और वो भी मेरे दोस्त होकर..."
और अंत में सलीम और मिथिलेश की लड़ाए हो जाती है और भूखे पेट ही मिथिलेश को वापिस आना पड़ता है.
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ब्लॉगर सलीम ख़ान ने कहा…
दूसरा विकल्प:
सलीम को चाहिए कि वह कुछ ऐसी चीज़ लेकर आये जिससे वो दोनों ही बड़े मज़े से खाते और अपनी दोस्ती को बरक़रार रखते !!
आपका क्या कहना है "दोनों में से कौन सा विकल्प अपनाना चाहिए, सलीम को ?
dekho kuchh apne blog se bahar bhi .
भई सलीम खान आज तो आपने सचमुच मुझे वो अंग्रेजी में क्या कहते हैं pleasant surprise दे दिया. मैं तो समझा था कि आप भी पाकिस्तानी पिट्ठू गिलानी के नक़्शे क़दमों पर चल पड़े. चलो जो भी हो मजा आया.....
सलीम भाई .. आप को दूसरी की बात सुननी ही नाही है ???? इसलिए उदाहरन पर उदहारण दे रहे है ??
१)सलीम "नहीं आप मेरे घर पर आये हैं और यहाँ मेरी ही मर्ज़ी चलेगी, आखिर हम सब मुस्लिम तो मांसाहारी हैं तो आखिर आप क्यूँ नहीं खा सकते"
अ) आप की गलती है की आप उन को मुस्लिमो में count कर रहे .. और हम आप को इंडियन.. जो की आप इंडियन है और मितिलेश हिन्दू है
चलो आप की भाषा में आप को समजाते है ....
सलीम और रॉबर्ट दोस्त है! सलीम ने रोबेर्ट को खाने पर बुलाया होता है! और रॉबर्ट सूअर को लेकर जाता है. क्या आप रॉबर्ट को सूअर के साथ अंदर लेंगे और अंदर आ भी गया तोह बाहर नाही निकालेंगे ? क्यों की वोह आप का घर है! आप के RULE वहां चलते है!
वैसे ही हम लोग इंडिया में रहते है. यहाँ वही चलेगा जो यहाँ के लोग चाहते है! अगर आप को आप की मुस्लिम शयरिअत या रूल करने है ?? तोह पाकिस्तान क्यों बनवाया है ??
अगर इंडिया में रहकर इंडिया के प्रति वफादारी दिखानी है१ तोह वंदे मातरम गाना ही होगा....
चलो आप समज जाये तोह कुछ बात है ...
जय हिंद...
और एक बात .. As usual इस की REPLY की अपेक्षा नाही करता ....
....................................................................................................................
जानवर और इंसानों में येही फरक होता है की .. इन्सान जवाब दे सकता है ... जानवर नाही ...
धन्यवाद
महाभारत में रंतिदेव नामक एक राजा का वर्णन मिलता है जो गोमांस परोसने के कारण यशवी बना. महाभारत, वन पर्व (अ. 208 अथवा अ.199) में आता है
राज्ञो महानसे पूर्व रन्तिदेवस्य वै द्विज
द्वे सहस्रे तु वध्येते पशूनामन्वहं तदा
अहन्यहनि वध्येते द्वे सहस्रे गवां तथा
समांसं ददतो ह्रान्नं रन्तिदेवस्य नित्यशः
अतुला कीर्तिरभवन्नृप्स्य द्विजसत्तम ---- महाभारत, वनपर्व 208 199/8-10
अर्थात राजा रंतिदेव की रसोई के लिए दो हजार पशु काटे जाते थे. प्रतिदिन दो हजार गौएं काटी जाती थीं
मांस सहित अन्न का दान करने के कारण राजा रंतिदेव की अतुलनीय कीर्ति हुई.
इस वर्णन को पढ कर कोई भी व्यक्ति समझ सकता है कि गोमांस दान करने से यदि राजा रंतिदेव की कीर्ति फैली तो इस का अर्थ है कि तब गोवध सराहनीय कार्य था, न कि आज की तरह निंदनीय
जय हिंद: दोस्तों
आज मै पहली बार इस ब्लॉग पे आया हूँ, दोस्तों यहाँ तो हिन्दू मुसलमान की जंग चल रही है बाह बहतरीन, पर दोस्तों एक बात सोचो इस्लाम का उदय हुआ (c. 570 – 632) के आसपास, हिन्दुस्म आया 5500 BCE मै और मनाब जीबन प्रथ्वी पर 4.54 billion years
से है, इन धर्मो के अस्तित्व मै आने से पहले भी मनुष्य प्रथ्वी पर था, और उसे भी किसी न किसी अल्लाह या भगवन ने ही बनाया था, तब न तो बो हिन्दू था, न ही बो मुसलमान न ही और कोई, क्यों की ऊपर बाले ने उसे इंसान बना कर भेजा था, पर हम सब बन गए क्या सोचो ..............
दोस्तों जब बेटा पहली बार बाप के सामने दारू पी के जाता है तो बाप उसे समझाता है ये मत करो, और जब बेटा हद पार कर देता है, तो बाप बेटे के पिछवाड़े मै लात देता और बोलता है जहा मरना है वहा जा के मर, अब मै कुछ नहीं कर सकता, वैसे ही आल्लाह , भगवन , god जो भी बो है उसने बहुत कोसिस की हमें समझाने की हम सिर्फ इंसान है , पर हमें तो लत लग गई है , हिन्दू मुसलमान ................की, तो ऊपर बाला भी किसी दिन हमारे पिछवाड़े पे लात दगा और बोलेगा भाड़ मै जाओ सब के सब तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता.
अब जरा देश की बात भी कर ले साहब, तो इस ब्लोग और उसके कमेन्ट को पड़कर बड़ा ही दर्द हुआ भाई, एक साहब की बड़ी जबरजस्त कमेन्ट है
"वन्दे मातरम को ज़बरन गंवाना क्या वास्तव में सही है? अगर कुछ ऐसा करने अथवा करवाने से किसी के अस्तित्व का प्रश्न खड़ा हो जाये तो क्या ये वाकई सही है. मैं तो इसे साजिशन बहुसंख्यक द्वारा मुसलमानों के अस्तित्व और नीवं पर प्रहार के बराबर मानता हूँ."
इस पे मै कहना चाहूगा की अगर बन्दे मातरम बोलने से किसी मुसलमान के अस्तित्व का प्रश्न कदा हो जाये गा तो क्या असफाक उल्ला खा मुसलमान नहीं था या टीपू सुलतान या सेराजुदौला , इन लोग ने हिन्दुतान की आजादी के लिए जंग लड़ी है साहब, और देश के लिए बन्दे मातरम भी बोला है,
और साहब १५ ऑगस्ट हर हिन्दुस्तानी के लिए फक्र का दिन है, ये दिन है जब हम सम्मान करते है उन सहीदो का जो देश के लिए जान दे गए, इस मात्र भूमि और इस पवन दिल का अपमान करना साहब बैसा ही है जैसे आप अपनी माँ का अपमान कर रहे हो .
अलविदा दोस्तों
जय हिंद: दोस्तों
आज मै पहली बार इस ब्लॉग पे आया हूँ, दोस्तों यहाँ तो हिन्दू मुसलमान की जंग चल रही है बाह बहतरीन, पर दोस्तों एक बात सोचो इस्लाम का उदय हुआ (c. 570 – 632) के आसपास, हिन्दुस्म आया 5500 BCE मै और मनाब जीबन प्रथ्वी पर 4.54 billion years
से है, इन धर्मो के अस्तित्व मै आने से पहले भी मनुष्य प्रथ्वी पर था, और उसे भी किसी न किसी अल्लाह या भगवन ने ही बनाया था, तब न तो बो हिन्दू था, न ही बो मुसलमान न ही और कोई, क्यों की ऊपर बाले ने उसे इंसान बना कर भेजा था, पर हम सब बन गए क्या सोचो ..............
दोस्तों जब बेटा पहली बार बाप के सामने दारू पी के जाता है तो बाप उसे समझाता है ये मत करो, और जब बेटा हद पार कर देता है, तो बाप बेटे के पिछवाड़े मै लात देता और बोलता है जहा मरना है वहा जा के मर, अब मै कुछ नहीं कर सकता, वैसे ही आल्लाह , भगवन , god जो भी बो है उसने बहुत कोसिस की हमें समझाने की हम सिर्फ इंसान है , पर हमें तो लत लग गई है , हिन्दू मुसलमान ................की, तो ऊपर बाला भी किसी दिन हमारे पिछवाड़े पे लात दगा और बोलेगा भाड़ मै जाओ सब के सब तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता.
अब जरा देश की बात भी कर ले साहब, तो इस ब्लोग और उसके कमेन्ट को पड़कर बड़ा ही दर्द हुआ भाई, एक साहब की बड़ी जबरजस्त कमेन्ट है
"वन्दे मातरम को ज़बरन गंवाना क्या वास्तव में सही है? अगर कुछ ऐसा करने अथवा करवाने से किसी के अस्तित्व का प्रश्न खड़ा हो जाये तो क्या ये वाकई सही है. मैं तो इसे साजिशन बहुसंख्यक द्वारा मुसलमानों के अस्तित्व और नीवं पर प्रहार के बराबर मानता हूँ."
इस पे मै कहना चाहूगा की अगर बन्दे मातरम बोलने से किसी मुसलमान के अस्तित्व का प्रश्न कदा हो जाये गा तो क्या असफाक उल्ला खा मुसलमान नहीं था या टीपू सुलतान या सेराजुदौला , इन लोग ने हिन्दुतान की आजादी के लिए जंग लड़ी है साहब, और देश के लिए बन्दे मातरम भी बोला है,
और साहब १५ ऑगस्ट हर हिन्दुस्तानी के लिए फक्र का दिन है, ये दिन है जब हम सम्मान करते है उन सहीदो का जो देश के लिए जान दे गए, इस मात्र भूमि और इस पवन दिल का अपमान करना साहब बैसा ही है जैसे आप अपनी माँ का अपमान कर रहे हो .
अलविदा दोस्तों
दौलत न अता करना मौला,सोहरत न अता करना मौला.
बस इतना अता करना मौला, चाहे जन्नत न अता करना मौला
सम्मये बतन की लौ पर जब कुर्वान पतंगा हो
होठो पे गंगा हो हाथो में तिरंगा हो
Sriman benami hindustan me rahne wale sabhi log hindu hi kahe jayenge. Chahe wo kisi bhi majhab ke ho. Sabse purane dharm granth ved me kahi bhi nahi likha ki tu hindu ya koi aur majhab ka ban. Tu manav ban yahi ved ka sandesh hai. Hame yeh adhikar nahi ki hum apne vicharo ko dusre par jabardaste thopen. Hame dusre ke vicharon ki izzat karni chahiye. Matra vande matram kahne se hi koi desh bhakt ya desh drohi nahi ho jata. Jaise ki muh me ram bagal me chhuri.
Dil me desh prem ka jajba tatha desh ki bhalai ke liye kuchh bhi karna hi sachchi desh bhakti hai. Aur kisi ek din vishes ko hi nahi, ye har roj honi chahiye
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