डूबते हुए सूरज ने कहा- 'मेरे बाद इस संसार में मार्ग कौन दिखलायेगा? कोई है जो अंधेरों से लड़ने का साहस रखता हो?' और फिर एक टिमटिमाता हुआ दीया आगे बढ़ कर बोला -- 'मैं सीमा भर कोशिश करूँगा!' - सलीम खान, लखनऊ/पीलीभीत, उत्तर प्रदेश Email: swachchhsandesh@gmail.com

अगर अदालत में किताब खुल जाएगी तो लाल कृष्ण आडवानी को भी माँस खाना पड़ेगा और अटल बिहारी और बाल ठाकरे को भी.

Written By सलीम ख़ान on शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011 | Friday, April 01, 2011

पिछली पोस्ट में अपने दोस्त साहब सिंह से हुई बातचीत का विवरण यहाँ दिया था. साहब सिंह को कुछ-कुछ समझ आने लगा था कि वाक़ई उसने अध्ययन न करके बड़ी ग़लती की. उसने वादा किया कि वह अध्ययन करेगा और सुनी-सुनाई या बाप-दादा जो करते आये वह नहीं करेगा.

उससे मैंने कहा भाई मेरी बातों को सकारात्मक रूप से लो और आगे भी सुनो कि एक नहीं हज़ारों ऐसी समानताएं हैं जो कि इस्लाम और हिन्दू धर्म के बीच यकसां हैं. उसने बड़ी उत्सुकता से कहा- सलीम भाई, बताओ तो ज़रा! 

मैंने उससे जो कहा उसका स्क्रिप्ट वर्ज़न यहाँ पेश कर रहा हूँ:::

माँस
साहब सिंह, तुम्हें टच करने की इजाज़त है अगर मैं राई बराबर भी झूठ बोलूं. बहुत बड़ा घोटाला हो चुका है. धर्म में बहुत मिलावट आ गयी है और इसका हल है सिर्फ़ अध्ययन. मैं जो बोल रहा हूँ उसको अगर नागवार समझते हों तो चलाओ मुक़दमा मुझ पर लेकिन तुम मुझ पर मुक़दमा क्यूँ नहीं चला सकते हो, अगर मुकदमा चलाया तो अदालत में किताब खुल जाएगी- मनुस्मृति, रामायण, गीता तो तुम्हें भी गोश्त खाना पड़ेगा और लाल कृष्ण आडवानी को भी. अटल बिहारी और बाल ठाकरे को भी गोश्त खाना पड़ेगा...!  

साहब सिंह ने कहा- अब मैं जब भी समय मिलेगा थोडा बहुत अध्ययन ज़रूर करूँगा !!!

(पाठक बन्धुवों के लिए शाकाहारी और मांसाहारी के विषय के सारे लेख यहाँ क्लिक करके पढ़ें)

1 पाठकों ने अपने विचार व्यक्त किये:

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

अगर तीनों पहले से ही माँसाहारी हुए तो ... ?

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