डूबते हुए सूरज ने कहा- 'मेरे बाद इस संसार में मार्ग कौन दिखलायेगा? कोई है जो अंधेरों से लड़ने का साहस रखता हो?' और फिर एक टिमटिमाता हुआ दीया आगे बढ़ कर बोला -- 'मैं सीमा भर कोशिश करूँगा!' - सलीम खान, लखनऊ/पीलीभीत, उत्तर प्रदेश Email: swachchhsandesh@gmail.com

ब्लॉगर की किन-किन हरक़तों से ब्लॉग एग्रीगेटर का सौन्दर्य बिगड़ता है? एक सम-समियिकी विश्लेषण.

Written By सलीम ख़ान on रविवार, 3 अप्रैल 2011 | Sunday, April 03, 2011

मुद्दे की बात पर अगर मैं यही से शुरू हो जाऊंगा तो कई फ़ायेदे होंगे::: एक- समय बच जायेगा. दो - पोस्ट पढने में शीघ्र ही मज़ा आने लगेगा. तीन- मुझे कीबोर्ड पर अपनी उँगलियों को कम ही ज़हमत देनी पड़ेगी. 

निम्नलिखित कारणों से हिन्दी ब्लॉग के ख़ूबसूरत, नहीं बेहद ख़ूबसूरत एग्रीगेटर का सौन्दर्य बिगड़ जाता है:::
  • अगर ब्लॉगर कोई सामूहिक ब्लॉग चला रहा है तो वह स्वतः हिन्दी ब्लॉग एग्रीगेटर के सौन्दर्य को बिगड़ने का दोषी मान लिया जायेगा.
  • अगर सामूहिक ब्लॉग का मालिक कोई मुसलमान है तो फिर उसकी ख़ैर नहीं उसके लिए 'यमराज प्रवृत्ति' त्वरित रूप से लागू होगी. *'यमराज प्रवृत्ति को जानने के लिए यहाँ क्लिक करें.
  • उस सामूहिक ब्लॉग के मालिक का फ़ोटो बिना किसी ख़ास मेहनत के बार-बार एग्रीगेटर पर दर्शित होगा जो कि असहनीय है क्यूंकि फलां ब्लॉग एग्रीगेटर पर अब चुकि बहुमत वर्ग का आधिपत्य हो गया है इसलिए उन्हें सामूहिक ब्लॉग के मालिक का फ़ोटो अब अत्यंत नागवार गुज़र रहा है. ख़ास कर सलीम का.
  • चूँकि फेसबुक विदेशी बाला है और हिन्दी ब्लॉग एग्रीगेटर भारतीय इसलिए उसका प्राकृतिक रूप से सौन्दर्य अपने आप ही कम है इसलिए उसके चेहरे पर कई लोग एक साथ न देंखें. इससे भी उसका सौन्दर्य बिगड़ जाता है.
  • बहुमत के तथ्यात्मक सौदे के तहत उनका पावडर ब्लॉग एग्रीगेटर के लिए ठीक नहीं इसलिए हमारा ब्लॉग एग्रीगेटर सिर्फ बहुमति-कृत पावडर ही इस्तेमाल करेगा.
  • अगर किसी मुसलमान ब्लॉगर ने अपने ब्लॉग के पोस्ट को हाई लाईट करने के उद्देश्य से कोई नया बल्कि बहुत ही नया तरीक़ा इस्तेमाल किया तो वह ब्लॉग एग्रीगेटर के सौदर्य को स्वतः ही बिगड़ने वाले की श्रेणी में मान लिया जायेगा.
क्या करें:::
  • चाटुकारिता के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान हो जाएँ तो फिर आप अगर ब्लॉग एग्रीगेटर का बलात्कार भी कर दें बल्कि उसकी हत्या भी कर दें तब भी आप सौन्दर्य बिगाड़ने वाले न कहलायेगे.
  • अगर ब्लॉग एग्रीगेटर का मालिक मुसलमान है तो उसे बहुमत का डर दिखा कर उसमें घुसपैठ कर लें.
  • ब्लॉग एग्रीगेटर के मालिक को झाड़ पर चढ़ा कर बंधक बना लें.
  • ब्लॉग एग्रीगेटर की बुद्धि को लोकतांत्रिक घुट्टी पिला कर उसकी पूंछ दबा लें.
  • क्रिकेट के इस मौसम में ब्लॉग एग्रीगेटर पर स्लॉग ओवर इतनी बार खेलें कि कैप्टन (एग्रीगेटर मालिक) का नाम ओ निशान तक नज़र न आये.
  • ब्लॉग एग्रीगेटर के मालिक को कल्पना और परिकल्पना के जाल में इस क़दर उलझा दें कि वह अपना वजूद भी महसूस न कर सके.
  • चूँकि ब्लॉग एग्रीगेटर के मालिक की आँखों में लोकतांत्रिक बनाने का शौक़ परवान चढ़ चूका है इसलिए उसे तुरंत कैश करा लें.
अगर आप उपरोक्त में से कुछ न कर सकें तो या तो:::
बहुमत समाज के कहे अनुसार चले अथवा अपना ब्लॉग (मेरी तरह) उस ब्लॉग एग्रीगेटर से हटा लें और कुरआन की इस शिक्षा को याद कर लें कि "जब ईश्वर एक दरवाज़े बंद कर देता तो दस दरवाज़े खोल देता है."
 तो अब आपने जाना कि ब्लॉगर की किन-किन हरक़तों से ब्लॉग एग्रीगेटर का सौन्दर्य बिगड़ता है?

2 पाठकों ने अपने विचार व्यक्त किये:

akhtar khan akela ने कहा…

salim bhaai kdvaa he or sht prtisht sch he is himmt ke liyen bdhai ho. akhtar khan akela kota rajasthan

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Indli का क्या गेम है भाई ?
हमारा काम चेतावनी देना था कि जिन लोगों ने ब्लॉगवाणी पर नाजायज़ प्रेशर बनाने की कोशिश की और नाकाम रहे वही लोग अब हमारी वाणी की कब्र खोद रहे हैं. हमने अपना काम कर दिया है . हमारी वाणी के मालिकों को कुछ अरसे बाद खुद पता चल जायेगा कि किसने क्या राजनीती की और हमारीवाणी को क्या नुकसान पहुँचाया है ?
ईश्वर का एक नाम काल भी है .
समय बहुत जल्द बताएगा सब कुछ लेकिन क्या मैं तब तक पूछ सकता हूँ कि

क्या इसे ‘वर्चुअल कम्युनलिज़्म‘ का नाम दिया जा सकता है ? virtual communalism

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