समानताओं के आधार पर हम आपस में क़रीबी ला सकते हैं:::
मैं एक बार शंकर भगवान्, पार्वती एवं गणेश जी की कहानी सुनी थी और जब मैंने पैग़म्बर इब्राहीम (अ.) और इस्माईल (अ.) की जीवनी पढ़ी तो उन दोनों ही घटनाओं में कुछ कुछ समानताएं लगीं जिसे मैं आपसे शेयर कर रहा हूँ.
शंकर भगवान्, पार्वती एवं गणेश जी की कहानी:::
एक बार माता पार्वती ने अपने मैल और कुचैल से गणेश जी को पैदा कर दिया और वो नहाने जाने लगीं. उन्होंने गणेश जी से कहा- "पुत्र, तुम बाहर खड़े होकर पहरा दो और किसी को भी अन्दर दाख़िल न होने देना."
उधर कहीं से शंकर जी आ गए और अन्दर दाख़िल होने लगे तो उन्हें गणेश जी ने रोका और कहा- "ऐ अजनबी, तुम अन्दर दाख़िल नहीं हो सकते क्यूंकि मेरी माँ नहा रही है.""तुम्हारी माँ... कौन?"
"पार्वती जी"
"पार्वती जी तो मेरी पत्नी है, पर तुम...ये मोज़िजा कब हो गया?"
"आज ही तो उन्होंने मुझे अपने मैल और कुचैल से पैदा किया!"
"अच्छा....चलो हटो और मुझे अन्दर दाख़िल होने दो." शंकर जी गुस्से में बोले.
"आप अन्दर दाख़िल नहीं हो सकते !"
"हट जाओ"
"नहीं हटूँगा"
इतने पर शंकर जी ने तलवार निकाली (महाभारत पर्व 8) और गणेश जी की गर्दन उड़ा दी. पाठकों और हिन्दू भाईयों ध्यान दीजिये अगर मैं झूठ लिख रहा होऊं. महाभारत के पर्व 8 में ये लिखा है.
उधर पार्वती जी रोती-बिलखती हुई बाहर आईं और कहा- "मेरे बेटे को आपने मार डाला, मेरे बेटे को ज़िन्दा करो"
इस तरह से शंकर जी ने गणेश जी के कटे सिर को ढूंढ़ना शुरू किया और नाक़ामयाब होकर लौटे लेकिन फ़िर उनकी नज़र एक हाथी पर पड़ी तो उन्होंने उसकी गर्दन काट कर गणेश जी के गले में लगा दी.
एक बार पैग़म्बर इब्राहीम (अ.) के ख़्वाब में आया कि तुम अपनी सबसे ज्यादा अज़ीज़ चीज़ अल्लाह की राह में क़ुर्बान करो तो उन्होंने तमाम चीज़े दान की, बहुत सारे जानवर अल्लाह के राह में क़ुर्बान किये. मगर उन्हें लगातार ख़्वाब आते रहे और वो क़ुर्बान करते रहे. फ़िर उन्होंने सोचा कि मुझे तो सबसे ज्यादा अज़ीज़ मेरा बेटा (इस्माईल अलैहिस्सलाम) ही है.
तो उन्होंने इसका तज़किरा इस्माईल (अ.) से किया तो उन्होंने कहा कि जब अल्लाह हुक़म है तो आप उस पर ज़रूर अम्ल में लायें, मैं तैयार हूँ.
इब्राहीम (अ.) ने फ़िर अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़ अपने प्यारे और सबसे अज़ीज़ बेटे इस्माईल (अ.) को क़ुरबानी के नियत से उन पर छुरी चलाई. लेकिन छुरी को अल्लाह का हुक्म हुआ कि वह उनके प्यारे पैग़म्बर का बल भी बांका न करे. इस तरह स्वर्ग से एक दुम्बा आया जो इस्माईल (अ.) की जगह पर आ गया और वह कुर्बान हुआ. मैं बताता चलूँ कि इब्राहीम (अ.) की इस अदा हो और फ़रमाबरदारी को इतना पसंद फ़रमाया कि क़यामत तक इसे मुसलमानों पर फ़र्ज़ कर दिया. जिसे मुस्लिम लोग बकरा-ईद के रूप में कुर्बानी देकर मानते हैं.
विश्लेषण व सत्य की परख:::
ज़रा ध्यान दीजिये उधर गणेश जी गर्दन पर तलवार चलने का ज़िक्र है और इधर इस्माईल (अ.) की गर्दन पर छुरी चलने का ज़िक्र है. उधर गणेश जी की गर्दन कट जाने का ज़िक्र है तो इधर इस्माईल (अ.) पर छुरी नहीं चलती है बल्कि एक दुम्बा के ज़िबह होने का ज़िक्र मिलता है और उधर एक जानवर हाथी के काटने का ज़िक्र है.
जो अन्तर आप देख रहे हैं वह मिलावट की वजह से है जिसे बाद में बदल दिया गया. इसका सवाल ये है कि आखिर शंकर भगवान्, गणेश जी की गर्दन में हाथी का सिर कैसे जोड़ दिया जबकि इंसान की गर्दन हाथी की गर्दन से काफी छोटी होती है और यह गणेश जी की गर्दन में फ़िट कैसे हो गयी??? विज्ञान इस तर्क को मानने से इन्कार करता है. तो इसका जवाब आता है कि शंकर भगवान् ने चमत्कार के ज़रिये ऐसा कर दिया था. लेकिन वास्तव में देखा जाये तो असली चमत्कार तो तब होता जब शंकर जी गणेश जी की असली गर्दन ढूंढ़ कर लाते और उसे जोड़ते, मगर वहां ऐसा न हो सका !!!
लेकिन फ़िर भी हम देख सकते हैं कि दोनों में ही काफ़ी समानताएं है जिसे हम इन्कार नहीं कर सकते और गहन अध्ययन के उपरान्त सत्य मार्ग के पथिक बन सकते हैं.
विश्लेषण व सत्य की परख:::
ज़रा ध्यान दीजिये उधर गणेश जी गर्दन पर तलवार चलने का ज़िक्र है और इधर इस्माईल (अ.) की गर्दन पर छुरी चलने का ज़िक्र है. उधर गणेश जी की गर्दन कट जाने का ज़िक्र है तो इधर इस्माईल (अ.) पर छुरी नहीं चलती है बल्कि एक दुम्बा के ज़िबह होने का ज़िक्र मिलता है और उधर एक जानवर हाथी के काटने का ज़िक्र है.
जो अन्तर आप देख रहे हैं वह मिलावट की वजह से है जिसे बाद में बदल दिया गया. इसका सवाल ये है कि आखिर शंकर भगवान्, गणेश जी की गर्दन में हाथी का सिर कैसे जोड़ दिया जबकि इंसान की गर्दन हाथी की गर्दन से काफी छोटी होती है और यह गणेश जी की गर्दन में फ़िट कैसे हो गयी??? विज्ञान इस तर्क को मानने से इन्कार करता है. तो इसका जवाब आता है कि शंकर भगवान् ने चमत्कार के ज़रिये ऐसा कर दिया था. लेकिन वास्तव में देखा जाये तो असली चमत्कार तो तब होता जब शंकर जी गणेश जी की असली गर्दन ढूंढ़ कर लाते और उसे जोड़ते, मगर वहां ऐसा न हो सका !!!
लेकिन फ़िर भी हम देख सकते हैं कि दोनों में ही काफ़ी समानताएं है जिसे हम इन्कार नहीं कर सकते और गहन अध्ययन के उपरान्त सत्य मार्ग के पथिक बन सकते हैं.


6 पाठकों ने अपने विचार व्यक्त किये:
क्या यह वही सलीम है जो हिन्दु धर्म मे गलतियां समझा रहा था साहब सिंह को?
एक ही पोस्ट मे अकल ठिकाने आ गई?
लेकिन वास्तव में देखा जाये तो असली चमत्कार तो तब होता जब शंकर जी गणेश जी की असली गर्दन ढूंढ़ कर लाते और उसे जोड़ते, मगर वहां ऐसा न हो सका !!!
bahut khub
हा हा मेरी टिप्पणी पसंद नही आई तो मिटा डाली ?
इसी दम पर कहते हो कि मैं फ़लाँ फ़लाँ हूँ। क्या यार सलीम भाई ? छि
लो पढ़ो
मदन शर्मा V/s जमाल
आदरणीय मदन शर्मा जी,
जमाल बाबू से आप बहस में ना जीत पायेंगे। कारण ये है कि जमाल जी हिन्दी ब्लॉगजगत में मूर्खता और बेवकूफ़ियों का सबसे बड़ा नगाड़ा हैं। और आप तो न नगाड़ेबाज हो न अखाड़ेबाज, मेरी तरह। ये महाशय सिर्फ़ नगाड़ेबाज और अखाड़ेबाज दो ही लोगों से घबराते हैं। मेरे ब्लॉग पर आप इनकी दीन हीन दशा हमेशा देख सकते हैं। वहीं पर ये अपनी टोपी सहित पट्ट पाये जाते हैं।
शर्मा जी आपको स्मरण कराता हूँ, आपने इनसे मिलती जुलती एकमात्र वस्तु इस असार संसार में देखी होगी। मालुम क्या ? ही ही
बिल्ली का गू ।
हा हा
जो ना लीपने का होता है ना ही पोतने का। एम आय राँग ?
लो जमाल जी लो धोबी पछाड़।
आप कहते हो:-
(@ Rajpurohit ji ! हनुमान जी को भगवान तो मेरे पूर्वज श्री रामचंद्र जी ने भी नहीं माना भाई .)
जवाब:-
रामजी, आप जैसे बेसिरपैर दिमाग वालों के पूर्वज कहाँ से हो गये ? आप या आपके पूर्वज कन्वर्टेड याने मार मार मुसलमान बनाये गये थे क्या ?
और सुनो जब राम ने कहा कि तुम मम प्रिय भरतहिं सम भाई तब ही वो भगवान हो गये क्योंकि भगवान का भाई भगवान अण्डर्स्टुड।
आपके यहाँ तो अल्ला मियाँ सण्ड मुसण्ड याने सिंगल माने जाते हैं शायद। अब जब उनकी खुद किसी से रिश्तेदारी नहीं तो बताइये आप से क्या होगी यू टोपीबाज मामूली इंसान ?
इसीलिये शायद अल्ला मियाँ से निराश होकर आप भगवान राम को अपना पूर्वज बतलाने लग पड़े हैं। हो जाता है अक्सर निराशा में ऐसा। मैं और मदन शर्मा जी आपका यह दुख समझ सकते हैं।
जमाल जी नं २,
आप कहते हो:-
(मदन शर्मा जी ! भगवान का जो अर्थ आप बता रहे हैं उसे आप संस्कृत के किसी शब्दकोष में तो दिखा नहीं सकते , आप जैसे लोग खुद ही किसी भी चीज़ को भगवान बना लेते हो और किसी भी शब्द का कुछ भी अर्थ घोषित कर देते हो. आपको अपनी बात के पक्ष में प्रमाण देना चाहिए. आपकी बात सही होगी तो मैं आपकी बात मान लूँगा.)
यार जमाल बाबू, आप शब्दकोष (लुगत) भी मुसलमानी मोहल्ले के मीना बाजार से खरीदते हो। वहाँ कहाँ मिलेगा इसका अर्थ। अरे जब सारी की सारी Earth ही आप जैसे व्यर्थ (टोपीबाज मुल्लों) जो दरअसल यह छुपाने के लिये पहनी जाती है कि इस टोपी के नीचे कोई खोपड़ी (दिमाग) ही नही है) लोगों से भरी पड़ी हो तो तब ऊपरवाले पर बह्स करने का क्या अर्थ ?
हा हा और आपने जब अपने वालिद की बात नहीं मानी कि बेटा और कोई भले पैदा हो तो तू मत पैदा हो जाना, तब भी आप पैदा हो ही गये, तो शर्मा जी का दिया कोई भी प्रमाण क्या मानेंगे ?
ही ही।
जमाल बाबू नं ३
आप कहते हो:-
(@ मदन शर्मा जी ! आप संधि-विच्छेद करके जो अर्थ जबरन निकाल रहे हैं उसका आधार और स्रोत क्या है ?
किसी ग्रन्थ का हवाला तो दीजिये)
देखो जी, संधि-विच्छेद (खतना) के मास्टर तो आप ही लोग हो इसलिये इसका और स्रोत वही समझ लीजिये और रही बात ग्रन्थ की तो वो इस्लाम में होता है क्या ? आय डोण्ट थिंक सो।
हा हा
जमाल बेकाबू नं ४
आप कहते हो:-
(@ शर्मा जी ! आपके पास समय नहीं है तो हम तो आपको बुलाने नहीं गए थे . हमारे पास आये थे तो सोचकर आते कि अब वो ज़माने नहीं रहे कि जब लोग पंडत की बात इसलिए मान लेते थे कि पंडत जी कह रहे हैं . लोगों के इसी भोलेपन का फायदा उठाकर आपने जानवरों को इंसानों का भगवान घोषित कर दिया . घोर पाप किया पंडत जी आप जैसे लोगों ने.)
इसके जवाब में एक शेर ही काफ़ी है
शैख ने मस्जिद बना मिस्मार बुतखाना किया
तब तो एक सूरत भी थी अब साफ़ वीराना किया
जमाल बाबू नं ५
आप कहते हो:-
(विधवाओं की दुर्दशा के पीछे भी यही कारण है , जो कि इस पोस्ट का विषय है . लेकिन इस्लाम के प्रभाव में आकर विधवाओं की सोच काफी बदल गयी है. अब वे भी जीना चाहती हैं .
अगली बार जब आप आयें तो समय निकलकर और प्रमाण ढूंढ कर ज़रूर लायें)
सही कहा आपने इस्लाम के प्रभाव में आकर विधवाओं की सोच काफ़ी बदल गई है याने वो विधवा की जगह बेवा हो गई हैं है ना ?
आपकी वो मीना बाजार वाली लुगत में देखना जरा ?
हा हा।
और सुनिये लोग तो आप को ही समय से निकाल देने के मूड में हैं। अब मत पगलाओ डॉ. साहब, ऐसे में तबियत और फ़ितरत और किस्मत सब की सब बिगाड़ लोगे। आपका सबसे अजीज दोस्त हूँ तो इतना ही कहता हूँ कि मेरी टिप्पणियाँ मिटाने की जगह उन्हें दिल और मन लगाकर पढ़ डालो तुम्हारी जिंदगी तर जायेगी और ये नजर के पर्दों की धूल अपने आप झड़ जायेगी।
अपने नाम को भी उसी लुगत में देख लेना और फिर सोचना कि क्या तुम्हारे काम का भी वही अर्थ है जो तुम्हारे नाम का होना चाहिये ?
चलता हूँ।
बाय बाय भाय
bhrata salim khan ji me kiske ke pakhsh ki baat nahi kar reha bas kush apne jo galat jankare di hai hindu dharam ke bare me use sahi karna chahta hoon apne keha ki shivji ose dondh na sake to hathi ka sir le aye darasal jab ganesh ji ke sir ko trishul se kata gya to vah udkar ek nartaki(indra ke darbar me nachne wali,aapsra) ke pair me agya tha bhagwan kami,krodhi,lobhi,mohi,ahankariyon se door rehte hai to us aapsra me yeh sabhi avgun they to bhagwan ka sir apavitra ho gya tha to bad me vo ssir mansrovar me sma gya tha dusri tarf parvati mata ke kehne pr shiv ne dakshin me baithe hathi ke bachey ka sir katkar laga diya tha kyunki vooh apne maa se chupa kar bhojan kha reha tha matlab jo bhi maa baap ko kashta deta hai vo nasht avashya hota hai agar koi galat baat keh de hoo to chota bhai sammjh ke shama kar de
Hindu dharm fake hai
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