डूबते हुए सूरज ने कहा- 'मेरे बाद इस संसार में मार्ग कौन दिखलायेगा? कोई है जो अंधेरों से लड़ने का साहस रखता हो?' और फिर एक टिमटिमाता हुआ दीया आगे बढ़ कर बोला -- 'मैं सीमा भर कोशिश करूँगा!' - सलीम खान, लखनऊ/पीलीभीत, उत्तर प्रदेश Email: swachchhsandesh@gmail.com

इस्लाम ही सच्चा धर्म है तो क्या उससे पहले के व्यक्ति की मुक्ति नहीं होगी?

Written By सलीम ख़ान on बृहस्पतिवार, 28 अप्रैल 2011 | Thursday, April 28, 2011

इस्लाम से पहले क्या था? 
प्रायः यह पूछा जाता है कि इस्लाम से पहले कौन सा धर्म था? अगर इस्लाम ही सच्चा धर्म है तो क्या उससे पहले के व्यक्ति की मुक्ति नहीं होगी? यह अक्सर प्रश्न नॉन-मुस्लिम भाई पूछते रहते हैं. वैसे इसका एक मुख्य कारण है. क्यूंकि वे समझते हैं कि इस्लाम मुहम्मद सल्ल० द्वारा बनाया गया मात्र 1400 साल पुराना धर्म है. यह प्रश्न भी इसी ग़लतफ़हमी के चलते ही लोगों के ज़ेहन में रचा बसा है कि इस्लाम धर्म केवल 1400 साल पहले से है और मुहम्मद सल्ल० उसके संस्थापक हैं जबकि मुहम्मद सल्ल० इस्लाम के संस्थापक नहीं बल्कि अंतिम प्रवर्तक यानि आखिरी रसूल थे, और स्पष्ट है कि जिसका कोई अंतिम हो उसका कोई पहला भी होगा. तो वह पहला कौन है? कुरआन में कई जगह इसका ज़िक्र है कि आदम अलैह० ही वह प्रथम है. वही प्रथम प्रवर्तक यानि ईश्वर के प्रथम दूत भी थे जिन्होंने अपनी संतानों को ईश्वरीय सन्देश पहुँचाया और ईश्वरीय शिक्षा दी और जो कुछ भी उन्होंने बताया वही उस वक़्त का इस्लाम था या यूँ कहें कि उन्हीं से इस्लाम धर्म का आरम्भ हुआ.

यहाँ यह प्रश्न उठता है कि वह आज के मुसलमान की तरह नमाज़, रोज़ा करते अथवा ज़कात आदि देते थे? इसका स्पष्ट उत्तर है कि यह ज़रूरी नहीं कि उन्हें भी हूबहू ऐसा ही करने का आदेश हो क्यूंकि मात्र रोज़ा नमाज़ आदि का नाम ही इस्लाम नहीं है बल्कि ईश्वरीय आदेशों के पालन का ही इस्लाम है. अतः मुहम्मद सल्ल० से पहले जितने भी नबी अथवा रसूल अथवा सन्देश वाहक आये और जिनकी संख्या हदीसों में 1 लाख 24 हज़ार बताई गयी है, जो कुरआन के अनुसार अलग क्षेत्रों में अलग अलग भाषाओँ में उपदेश लेकर आये. उन्होंने अपने अपने समय में जो कुछ भी पेश किया वही उस समय का इस्लाम था.

यहाँ यह पुष्टि भी बेहद ज़रूरी है कि कुरआन हमें यह बताता है कि दुनियां के हर क्षेत्र में और राष्ट्र में ईश्वर ने अपना पैग़ाम पहुँचाने के लिए  और सत्य मार्ग बतलाने के लिए मार्गदर्शक भेजे हैं. वह अपने लोगों को जो पैग़ाम देते थे वही उस समय का इस्लाम था.

क्या भारत में भी ईश्वरीय पैग़म्बर या अल्लाह के रसूल हुए हैं
इस विषय पर जब हम धर्म, इतिहास का अध्ययन करते हैं तो हमें पता चलता है कि पवित्र कुरआन में कम से कम 2 (दो) ऐसे नबियों का ज़िक्र मिलता है...!!! 2 नबियों का वर्णन है जो भारत की सरज़मीन पर आये. कुरआन में कुल 1 लाख 24 हज़ार नबियों का वर्णन मिलता है जिसमें एक- आदम अलैह० और दुसरे- हज़रत नूह अलैह० हैं. नूह अलैह० की जीवनी सनातन धर्म के मनु से हूबहू मिलती है.

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