डूबते हुए सूरज ने कहा- 'मेरे बाद इस संसार में मार्ग कौन दिखलायेगा? कोई है जो अंधेरों से लड़ने का साहस रखता हो?' और फिर एक टिमटिमाता हुआ दीया आगे बढ़ कर बोला -- 'मैं सीमा भर कोशिश करूँगा!' - सलीम खान, लखनऊ/पीलीभीत, उत्तर प्रदेश Email: swachchhsandesh@gmail.com

जनगणना पुस्तिका में कहीं भी इस्लाम शब्द है ही नहीं::: हल्ला बोल

Written By सलीम ख़ान on शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011 | Friday, April 29, 2011


क्या यह अपने आप में अत्यंत सोचनीय नहीं है कि जो लोग हिन्दू शब्द को धर्म से जोड़ देते है वह बिना सर पैर के है अर्थात सिर्फ भावनात्मक है. मैं आप सबको इधर बैठ कर चैलेन्ज करता हूँ कि हिन्दू शब्द, हिन्दू धर्म ग्रन्थ की किसी भी पुस्तक में नहीं है फिर चाहे वह वेद हों, पुराण हों, उपनिषद हों, रामायण हो, महाभारत हो या फिर लेटेस्ट तुलसीदास कृत रामचरित मानस ही क्यूँ न हो. किसी भी हिन्दू धर्म ग्रन्थ की किसी भी पुस्तक में ये शब्द ढूंढने से भी नहीं मिलेगा. एक और चैलेन्ज भी है कि उपरोक्त सभी पुस्तकों में इस्लाम धर्म और मुहम्मद सल्ल० का ज़िक्र एक नहीं कई मर्तबा है, यहाँ तक कि तुलसीदास कृत राम चरित मानस में भी. आपको अगर यकीन नहीं है तो आप स्वयं पढ़ लीजियेगा. मेरा काम है सच बताना और वो मैं कर रहा हूँ.

पिछली मर्तबा जब जनगणना वाले मेरे घर आये तो उन्होंने मेरा धर्म पूछा तो मैंने कहा- इस्लाम. 

जनगणना कर्मी ने कहा - साहब, इस नाम का कोई भी धर्म जनगणना की फिलिंग-शीट पर उपलब्ध नहीं बल्कि अगर आप मुसलमान धर्म लिख दें तो ठीक है. 

मेरे को अत्यंत आश्चर्य हुआ कि ये कैसे हो सकता है. मैंने कहा- जनाब ! आप ठीक से देखो. 

उन्होंने कहा, मैं जानता हूँ और मैंने ठीक से देख लिया है कि इस्लाम नाम का कोई धर्म भारतीय जनगणना की पुस्तिका में उपलब्ध नहीं है और अगर आप फ़िर भी जिद पर अड़ेंगे और अपना धर्म इस्लाम ही लिखवायेंगे तो वह अन्य धर्मों की श्रेणी में गिना जायेगा, मुसलमानों में आपकी गिनती नहीं हो सकती है.

मैंने कहा- कमाल है, ये कैसी विडंबना है, एक तरफ़ हिन्दू धर्म लिखा है जबकि उनकी किसी भी पुस्तक में हिन्दू शब्द है ही नहीं और दुसरी तरफ़ इस्लाम लिखा ही नहीं है जबकि मुसलमानों का धर्म इस्लाम ही है.

फ़िर भी मैंने कहा- भैया, ज़रा ठीक से देखो, लगता है आपको कोई ग़लतफ़हमी हुई है.

कर्मी ने कहा- ग़लतफ़हमी मुझे नहीं आपको हो गयी है. इस जनगणना पुस्तिका में कहीं भी इस्लाम शब्द है ही नहीं !!!

9 पाठकों ने अपने विचार व्यक्त किये:

DEVDAS ने कहा…

अबे हाँ एक बात और
अबे तू अनाथ हो गया बे .... तेरा बाप लादेन मारा गया और वो भी तेरे मायके पाकिस्तान में.... आ़क थू

हिमांशु गुप्ता ने कहा…

devdas ki pahli tippani bhi to prakashit karo saleem bhai

किलर झपाटा ने कहा…

अरे सलीम भाई,
ये हिन्दू नाम भी तो मुस्लिम आक्रांताओं का दिया हुआ है और फिर अँग्रेज भी उस पर ठप्पा लगा गये। और ठीक ही तो कहा जनगणना कर्मियों ने कि वास्तविक इस्लाम धर्म अब बचा कहाँ मुसलमानों में। और अब अमरीका को भी आखिर उसी धर्म को अपनाना पड़ गया हाँ अमरीका वालों की स्पैलिंग जरा अलग है i.e. मसल मान। हा हा।

और देवदास जी आपको टिप्पणी शालीन भाषा में करना चाहिये।
क्या सलीम भाई ने लेख अशालीन भाषा में लिखा है ?

हलचल ने कहा…

सलीम को कितनी बार समझाये कि हिंदू किसी धर्म का नही सिर्फ एक संस्कृति का नाम है |
जहा पर सबको सामान भाव से जीने का अधिकार है गैर धर्म हो या कोई , कोई अलग नाम से किसी को नही बुलाया जाता है जैसे इस्लाम में गैरमुस्लिमो को "काफ़िर"|
इस्लाम कितना दोगला धर्म है सबूतों को दिखने कि जरुरत नही है |

सलीम के लिए शब्द -
सलीम तुम ये बात बताओ कि २ मई को इस्लाम धर्म का एक पुत्र वीरगति को प्राप्त हुआ | उसको जन्नत में जाने के लिए भारत सहित मुस्लिम देशो में नमाज पढ़ा गया, तुम भी पढ़े होगे | लेकिन उसके बारे में कोई लेख नही लिखे ? अरे वह तुम जैसे बहुत मुस्लामानो के गुरु थे, उनके जन्नत में जाने कि खुशी / दुःख को ब्लॉगपर तो आना ही चाहिए था |

हलचल ने कहा…

सलीम तुम हिंदुस्तान को हिन्दोस्तान क्यों लिखते हो
?
हिंदुस्तान ही हर जगह लिखा जाता है |
हिन्दोस्तान तुम्हा बनाया शब्द है क्या ?
कि हिंदुस्तान में हिंदू है तो तुम्हारी पिछवाड़े में आग लगाती है |
जल्दी से सुधर लो शब्द को |

हलचल ने कहा…

एक बात तो पक्क्की है कि सलीम मिर्च मसल लगत है ब्लॉग में क्यों ?

क्यों कि एक दो को छोड़ कोई ब्लोगेर आता ही नही है | बेचारा सलीम !!!

हलचल ने कहा…

सलीम मई इंतजार कर रहा हू कि तुम्हारे बाप के मरने का गम ब्लॉग पर जल्दी दिखाओगे |

Anwar Ansari ने कहा…

सलाम मेरे हम वतन हिंदू भाइयों
इस्लाम मज़हब में कहा गया है कि किसी धरम को बुरा मत कहो क्योंकि अगर तुम किसी धरम को बुरा कहोगे तो वह तुम्हारे मजहब इस्लाम को बुरा कहेगा और वह नहीं जानता कि वह क्या कह रहा है. इसी तरह इस्लाम मज़हब में यह भी कहा है कि तुम किसी के माँ-बाप को गाली मत दो अगर तुम ऐसा करोगे तो वह तुम्हारे मन-बाप को गाली देगा और इस तरह तुम किसी के माँ-बाप को गाली देकर अपने माँ-बाप को ही गाली दोगे. इसी तरह की शिक्षाओं से इस्लाम भरा पड़ा है बस उसे समझने की ज़रूरत है.ऐसी शिक्षाएं किसी धरम में नहीं होंगी, ऐसा चेलेंज है. इसीलिए तो इस्लाम मज़हब के मानने वालों (नव मुस्लिमों) की तादाद में निरंतर हैरतअंगेज इजाफा हो रहा है और यही सच्चे मज़हब की निशानी है. धन्यवाद |

Unknown ने कहा…

अरेभाय चार शादि करोगे बारा पंद्राह बच्चे जनोगे तो ये मतलब नहि के ईस्लाम माननेवालो कि तादाद बढ गयी ये तो कौम कि आबादि बढि है।

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