डूबते हुए सूरज ने कहा- 'मेरे बाद इस संसार में मार्ग कौन दिखलायेगा? कोई है जो अंधेरों से लड़ने का साहस रखता हो?' और फिर एक टिमटिमाता हुआ दीया आगे बढ़ कर बोला -- 'मैं सीमा भर कोशिश करूँगा!' - सलीम खान, लखनऊ/पीलीभीत, उत्तर प्रदेश Email: swachchhsandesh@gmail.com

सलीम ख़ान की सदस्यता मीडिया क्लब ऑफ़ इंडिया से समाप्त की जाती है: Media Club of India

Written By सलीम ख़ान on बुधवार, 6 अप्रैल 2011 | Wednesday, April 06, 2011

जब मेरा यह इकतौला ब्लॉग था तब लोग बाग़ मुझे खूब बैन करते थे. लेकिन मैं हिन्दुस्तान का दर्द पर लिखता था और उसके मालिक श्री संजय सेन सागर जो कि एक सुलझे हुए इंसान थे ने मुझे कभी बैन नहीं किया. फिर मैंने मोहल्ला ब्लॉग ज्वाइन किया जिससे मुझे बैन कर दिया गया और उन लोगों एन आरोप क्या लगाया कि सलीम ख़ान इस्लाम का प्रचार करता है इसलिए सलीम की कोई जगह मोहल्ला ब्लॉग में नहीं है. आप खुद देखिये:::

तो अगर वाक़ई यही वजह है सलीम को बैन करने की तो मेरी तरह अन्य धर्मों के सैकणों ब्लॉगर्स, लेखक ऐसे है जो अपने धर्मों का प्रचार करते हैं. मैं एक नहीं सैकड़ों ब्लॉगर्स का नाम बता सकता हूँ वे सिर्फ़ अपने धर्म का प्रचार ही नहीं करते बल्कि इस्लाम पर प्रहार भी करते हैं.

मुझे पता नहीं कहाँ-कहाँ से बैन किया गया, मुझे खुद नहीं पता. और एक ब्लॉगर्स एसोसियेशन से तो मेरी पोस्ट करने की ताक़त को ख़त्म कर दिया मगर अपने ब्लॉग पर सक्रिय लेखकों की लिस्ट में मेरा नाम अभी भी चमक रहा है. (मैं उस ब्लॉग का नाम इसलिए नहीं लूँगा क्यूँकि मैं उन्हें अपने बड़े भाई की तरह मानता हूँ, रहूँगा.) 
   
आज जब मैं मीडिया क्लब ऑफ़ इंडिया को खोला तो देखा मुझको वहां से बैन कर दिया गया है. जबकि मैं MCI से जबसे जुडा हूँ जब यह बनी थी मैंने इसमें दर्जनों ब्लॉगर्स/ लोगों जुद्वाया और तरक्क़ी में योगदान दिया. आप खुद देखिये:::


इधर जब मैंने खुद ही सामूहिक ब्लॉग बना लिया तो लोगों के मन में पता नहीं क्या होने लगा कि एग्रीगेटर की ..... में उंगली करने लगे और संविधान में संशोधन करके ऐसा नियम बनाने लगे कि किसी भी तरह से सलीम के ब्लॉग नज़र न आयें. मुझे सबूत की ज़रुरत नहीं है बल्कि आजकल जो चल रहा है उसे ध्यान से समझें....सब समझ आ जायेगा. 

आखिर क्या है ये मानसिकता !?

वैसे इसका वर्तमान हल यह है कि सलीम तत्काल प्रभाव से अपने सभी सामूहिक ब्लॉग को डिलीट करदे, वे शांत हो जायेंगे. अगर ऐसा नहीं है तो सामूहिक ब्लॉग के लिए इतना हो हल्ला क्यूँ? क्या पहले सामूहिक ब्लॉग नहीं थे.... न जाने कितने हैं??? तो इसका अब वे जवाब देते हैं कि सामूहिक ब्लॉग पहले अपना उद्देश्य तय करें तब ही सामूहिक ब्लॉग बनायें....! उद्देश्य की जवाबदेही भी सिर्फ़ सलीम से ही है उनसे नहीं जो पहले से ही सामूहिक ब्लॉग चला रहे हैं.

5 पाठकों ने अपने विचार व्यक्त किये:

आलोक मोहन ने कहा…

बुरा हुआ

अहतशाम अली ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
अहतशाम अली ने कहा…

(एक पैगाम दोस्त के नाम)
कभी महक की तरह हम गुलों से उड़ते हैं!
कभी धुएं की तरह हम पर्वतों से उड़ते हैं!!
ये केंचियाँ हमें उड़ने से खाक रोकेंगी?
के हम "परों" से नहीं "हौसलों" से उड़ते हैं!!!
लावें दीयों की हवा में उछालते रहना
तुम गुलों के रंग पे तेजाब डालते रहना
में नूर बनके ज़माने में फ़ैल जाऊंगा,
तुम सूरज में कीड़े निकएलते रहना
लेकिन मुझे पूरा भरोसा है सलीम भाई आपकी आवाज़ कभी खामोश नहीं होगी, और आपका कलम हमेशा सच्चाई की तस्वीर बनाता रहेगा!

अहसास की परतें - समीक्षा ने कहा…

MCI ने अंततः सही कदम उठा ही लिया

किलर झपाटा ने कहा…

इस खुशी के मौके पर तो आपको पार्टी देना चाहिये सलीम खान।

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