डूबते हुए सूरज ने कहा- 'मेरे बाद इस संसार में मार्ग कौन दिखलायेगा? कोई है जो अंधेरों से लड़ने का साहस रखता हो?' और फिर एक टिमटिमाता हुआ दीया आगे बढ़ कर बोला -- 'मैं सीमा भर कोशिश करूँगा!' - सलीम खान, लखनऊ/पीलीभीत, उत्तर प्रदेश Email: swachchhsandesh@gmail.com

Suresh Chiplunkar जी, तब तो आपका राष्ट्रवाद वाकई पेशाब की झाग की तरह ही है?

Written By सलीम ख़ान on शनिवार, 2 अप्रैल 2011 | Saturday, April 02, 2011

सुरेश चिपलूनकर
सुरेश भाई ! आपका पूरा लेख पढ़ा ! और पढ़ कर अच्छा लगा. आप एक अच्छे लेखक और ब्लॉगर हैं. इसे मैं जानता भी हूँ और मानता भी हूँ क्यूँ कि आप लेखन सिर्फ अपनी चाटुकारिता के लिए नहीं बल्कि मक़सद के लिए लिखते हैं, यह एक अच्छी बात है. 


लेख के अंतिम तीन पैराग्राफ में आप गच्चा खा गए. जब आपने राष्ट्रवाद की बात कि इसलिए... मैं आपसे पूछना चाहता हूँ कि देशभक्ति और राष्ट्रवाद की बुनियाद सिर्फ पाकिस्तान के खिलाफ़ रहना ही है. उधर पाकिस्तान में भी आप ही कि तरह के कट्टरपंथी और इधर आप जैसे कट्टरपंथी लोग इस भावना में जी रहे हैं और इसके आगे बढ़ने की सोच ही नहीं रहे हैं. पाकिस्तान के खिलाफ़ मैच जीतने पर जितनी ख़ुशी आप ज़ाहिर करते हैं, अन्य देशों से जीतने पर क्यूँ नहीं करते, उस वक़्त आपका राष्ट्रवाद कहाँ चला जाता है? तार्किक रूप से बात करें तो इस तरह क्या इंग्लैंड हमारा दुश्मन नहीं हो सकता? उसने तो हमारे देश को सैकणों साल ग़ुलाम रखा???????????????????? 

अगर ऐसा ही है तो भैया वाक़ई आपका राष्ट्रवाद पेशाब की झाग की तरह है, जैसा की यह वाक्य आपने अपने ही ब्लॉग पर इस्तेमाल किया !!!!!!!!!!

आगे एक सॉलिड सवाल जिसका जवाब आपने पिछले डेढ़ साल से आज तक नहीं दिया, आज भी आप देंगे उम्मीद कम ही है !?

मैं चैलेन्ज के साथ यह ऐलान करता हूँ कि कम से कम भारत में अगर कोई राष्ट्रवाद का हिमायती है तो वह हिन्दू धर्म का हो ही नहीं सकता है, हिंदुत्व की तो बात ही छोडिये, जानना चाहेंगे कैसे तो आईये मैं बताता हूँ::: अगर कोई राष्ट्रवाद की परिकल्पना में विश्वास रखता है और यह विश्वास करता है कि वह राष्ट्रवाद के संघी पैमाने पर खरा उतर कर ही रहेगा तो फ़िर उसका पुनर्जन्म हो ही नहीं सकता. और अगर वह पुनर्जन्म में अक़ीदा रखता है तो फ़िर वह एक राष्ट्रवादी हो ही नहीं सकता. मिसाल के तौर पर अगर सावरकर जी का पुनर्जन्म अफ़गानिस्तान में तालिबान समर्थक में हुआ तो इस बात की गारंटी कौन लेगा कि भारत के ख़िलाफ़ किसी भी आतंकी घटना में वे लिप्त नहीं होंगे??? और अगर ऐसा हुआ तो उस राष्ट्रवाद का क्या होगा जिसे वीर सावरकर अपने कथित खून पसीने से सींचा था !!!??

8 पाठकों ने अपने विचार व्यक्त किये:

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

पुराने दोस्त का फ़ोटो दिखाने के लिए शुक्रिया ।
अगर आप हमारे भाई को धर्म की बात बताकर लोक परलोक के कल्याण का मार्ग दिखाएं तो वे कभी न कभी ज़रूर मानेंगे क्योंकि कोई भी आदमी अपना नुक्सान नहीं चाहता और उनकी अक़्ल भी हमसे कम नहीं है।

शून्य ने कहा…

मूर्ख.. विवेचना करना भी नहीं जानता... :D

Suresh Chiplunkar ने कहा…

क्या बात है सलीम भाई,

1) क्या टिप्पणियाँ मिलनी कम हो गई हैं?

2) लखनऊ ब्लागर एसो्सिएशन में अपने इस्लामी एजेण्डे को लेकर "बेनकाब" हो गये हो?

3) जापान की सुनामी और इस्लाम को लेकर लिखी पोस्ट में बहुत गालियाँ खाई हैं?

इनमे से कोई तो कारण है, जो तुमने मेरी तस्वीर सहित मेरी पोस्ट का विश्लेषण कर डाला, और साथ ही अपना वह पुराना बकवास सा सवाल भी पु्नः ठेल दिया है… :) :) बताओ ना… क्या कारण है? :)

अहसास की परतें - समीक्षा ने कहा…

सलीम हिन्दु धर्म का हिमायती जब पुनर्जन्म लेगा तो फिर से पाकिस्तान की गाण्ड मे डण्डा डालने के लिए हिन्दुस्तान मे ही जन्म लेगा - मिल गया ज़वाब।

अहसास की परतें - समीक्षा ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
ajeet ने कहा…

सुरेश भाई इन्हें माफ़ करो ये नहीं जानते ये क्या लिख रहे हैं, वैसे भी आपकी संक्षिप्त टिप्पणी रोंगटे खड़े कर देती है, ये बेचारे क्या खाकर आपका मुकाबला करेंगे, ये इस्लाम प्रचारक हैं और आप बुद्धीजीवी.और बुद्धी और इस्लाम नदी के दो किनारे हैं.

Ganesh Prasad ने कहा…

क्या हो गया है सलीम तुझे ?

क्यों इंडिया टीवी की तरह घटिया टी आर पी ले रहा है

Ganesh Prasad ने कहा…

सुरेश भाई की तस्वीर भी तूने चेप दे अपनी बकवास ब्लॉग पेज पे

सुरेश भाई भाई माफ़ करना इस नामा "कुल" को

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