डूबते हुए सूरज ने कहा- 'मेरे बाद इस संसार में मार्ग कौन दिखलायेगा? कोई है जो अंधेरों से लड़ने का साहस रखता हो?' और फिर एक टिमटिमाता हुआ दीया आगे बढ़ कर बोला -- 'मैं सीमा भर कोशिश करूँगा!' - सलीम खान, लखनऊ/पीलीभीत, उत्तर प्रदेश Email: swachchhsandesh@gmail.com

हाँ, ये इस्लामी आतंकवाद ही तो है ! Yes, This is Islamic Terrorism.

Written By सलीम ख़ान on रविवार, 17 अप्रैल 2011 | Sunday, April 17, 2011

आज पूरी की पूरी दुनियाँ आतंकवाद के चपेट में है. दुनियाँ का हर शख्स डरा हुआ है. जहाँ देखो वहां बम फट जाता है, जहाँ देखो वहां इंसान, गाड़ियों, स्टेशनों और बिल्डिगों के परकच्छे उड़ जाते हैं जिसमें हजारों बेक़सूर लोगों की जाने चली जाती हैं.

सवाल ये है कि आखिर ये कर कौन रहा है???

तो इसका जवाब समाज के बुद्धिजीवी वर्ग से लेकर आम जनता के मन में तुरंत ही आ जाता है और मामूली सूझबूझ वाला व्यक्ति भी आसानी से तुरंत ही कह उठता है कि इस आतंकवाद का नाम है- इस्लामी आतंकवाद !

और सही भी है क्यूंकि::: 

  • ये आतंकवाद न तो मार्कवादी आतंकवाद है जिसने आर्थिक बराबरी के नाम पर करोड़ों लोगों को मौत के नींद सुला दिया.
  • और न ही यह नस्ली आतंकवाद है जिसके तहत गोरों ने काले लोगों को हलाक़ कर डाला और जो (गोरे) ये समझते है कि उन पर (काले) लोगों पर अमानवीय ज़ुल्म करने का जन्मजात अधिकार है.
  • न ही यह माओवादी आतंकवाद है जो आर्थिक बराबरी के लिए मज़लूमों का क़त्ल कर रही है.
  • न ही यह लोकतान्त्रिक आतंकवाद है जिसमें बहुसंख्यक समुदाय द्वारा मनमाने उसूल और क़ानून बना कर अल्पसंख्यक और अपने से कमज़ोर वर्ग से न्याय, बराबरी और आज़ादी छीनने का क़ुदरती हक मिल जाता है.
  • न यह 'बोड़ो' व 'उल्फ़ा' का आतंकवाद है जिसकी आग में पूर्वोत्तर भारत के राज्य कई दशकों से जल रहें हैं.
  • और न ही यह 'मुंबईकर' का आतंकवाद जिसमें ग़ैर-मुम्बई वालों को इस हद तक भयभीत करता है कि मिलेनियम स्टार भी बिना किसी ग़लती के मुआफी माँगने पर मजबूर हो जाई.
  • न ही यह नक्सलियों का आतंकवाद है जिससे देश के 256 ज़िले प्रभावित हैं और नक्सल्वादी जो 5-5 दर्जन पुलिस वालों को एक साथ मौत कि नींद सुला सुला देते हैं, थाना और पुलिस स्टेशनों को उड़ा देते हैं और बस्तियों में आग लगा देते हैं.
  • और यकीनन यह वह आतंकवाद भी नहीं है जिसका आग्रह मुम्बई के मशहूर समाचार पत्र के मुखपत्र में पत्र के स्वामी ने यह कहते हुए कहा कि हिन्दू भी आत्मघाती दस्ते तैयार करें. उन्होंने ने हिन्दुओं द्वारा फुसफुसे बम बनाने के बजाये शक्तिशाली बम बनाने के लिए ललकारा.
  • हां, यहं वह आतंकवाद भी नहीं है जिसने पहले गुजरात फिर उड़ीसा और उसके बाद कर्णाटक में एक विशेष अल्पसंख्यक समुदाय को सीधा निशाना बनाया और लाखों अल्पसंख्यक लोगों को मौत की नींद सुला दिया. औरतों का बलात्कार कर दिया और गर्भवती स्त्रियों का पेट फाड़ डाला.


तो आपने जान ही लिया होगा कि ये आतंकवाद कौन है...............................!!!!   

(सन्दर्भ::: डॉ० असलम क़ासमी, 'आतंकवाद बेनक़ाब' पुस्तक से)

7 पाठकों ने अपने विचार व्यक्त किये:

किलर झपाटा ने कहा…

वैसे तो खान, आप लोग दुनिया के सचमुच डरे हुए शख्स हो क्योंकि जब भी आप लोगों को टिप्पणी की जाती है आप उसे मिटा देते हो। हा हा। मेरी टिप्पणियाँ आज हरीश याने बुल्ले मुसलमान और जमाल दोनों ने ही कई जगह से मिटाईं। ये घबराहट नहीं तो और क्या है ?
लो फिर देता हूँ टिप :-
अरे भाई लोगों ये हरीश सिंह नहीं, बुल्ले मुसलमान है यार, क्यों इसको हिन्दू समझ कर समझा रहे हो आप लोग। हा हा। और सलीम मियाँ कह रहे हैं वे जूतों से बात करते हैं। मत घबराइये मियाँ इधर हम भी झपाटे से बात करते हैं भाई। हा हा। और रही बात जमाल बाबू की, तो उन्हें तो वैसे ही इस्लाम का अजीर्ण हो गया है। बेचारे दवा खोजते फिर रहे हैं शिवलिंग में। शायद मिल जावे इन्हें, क्योंकि भोले बाबा कहाँ किसी को निराश करते हैं ?
बम बम ।

ajeet ने कहा…

मै समझता हूँ, की ऐसे लेख पढवाने से क्या इस्लामिक आतंकवाद का वज़न कम हो जाएगा, ज़रा गौर करिए ये जो आप आतंकवाद गिनवा रहे हैं ये किसी ना किसी रूप में या अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष भी कहे जाते हैं, आप शायद अखबार नहीं पढ़ते आज ही सुबह अखबार मैं पढ़ा की "लन्दन में बुर्का ना पहनने वाली महिलाओं की शामत" लन्दन के ट्रेवर हेमलेट स्थान पर मुस्लिम कट्टर पंथियों ने एक फरमान जारी कर दिया है की गैर मुस्लिम भी घर से बाहर बिना बुर्के के ना निकले नहीं तो अंजाम बेहद भयानक होंगे, अब बताओ इसे क्या कहा जाए देश उनका क़ानून उनके बीच मैं अपने शरिया क़ानून ठेलने वाले ये कौन लोग होते हैं, इसे आप इस्लामिक आतंकवाद नहीं कहेंगे तो क्या माओ वादी आतंकवाद कहोगे, बे वजह लोगों को बेवकूफ बनाना चाहते हो आप लोग , रही बात गुजरात की तो जितना सुखी मुसलमान गुजरात में है दुनिया मैं कही भी नहीं. भारतीय क्रिकेट टीम में तीन गुजराती खेल रहे हैं तीनों मुसलमान हैं, मुझे तो अब ऐसा लगने लगा है ऐसी बातें फैला कर मुसलमान लेखक भारत सरकार से तुष्टिकरण की मात्रा बढवाना चाहते हैं.

हिमांशु गुप्ता ने कहा…

कहाँ तक जवाब दोगे :


इस्लामाबाद। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि देश में नाबालिग हिन्दू लड़कियों का बलात धर्मपरिवर्तन हो रहा है जिससे अल्पसंख्यक समुदाय बहुत चिंतित है।
मानवाधिकार आयोग की वर्ष 2010 की रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत से मामले में हिन्दू लड़कियों का अपहरण और उनके साथ बलात्कार किया जाता है और बाद में उन्हें धर्मपरिवर्तन पर मजबूर किया जाता है। सिंध प्रान्त विशेष कर देश की व्यापारिक राजधानी कराची में जबर्दस्ती परिवर्तन की घटनाए हो रही है। पाकिस्तान की सीनेट की अल्पसंख्यक मामलों की स्थायी समिति ने अक्टूबर 2010 में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस उपाए करने का आग्रह किया था।
आयोग के कार्यदल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जबर्दस्ती धर्मपरिवर्तन की घटनाएं केवल सिंध तक सीमित नहीं है बल्कि देश के अन्य भागों में भी ऐसा हो रहा है। अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों का अपहरण या उसके साथ बलात्कार किया जाता है और बाद में यह दलील दी जाती है कि लड़की ने इस्लाम मजहब कबूल कर लिया है। उसकी मुस्लिम व्यक्ति से शादी हो गई है और वह अपने पुराने धर्म में लौटना नहीं चाहती।
कार्यदल ने कहा कि अदालते भी अल्पसंख्यक लड़की या उसके परिवार वालों के साथ इंसाफ नहीं करती। 12 या 13 साल की लड़की को भी अभिभावकों के संरक्षण में नहीं छोड़ा जाता। कार्यदल ने एक घटना का उल्लेख किया जिसमें 12 साल की एक लड़की ने यह कथित बयान दिया कि उसने स्वेच्छा से इस्लाम कबूल कर लिया है। अदालत ने परिवार वालों के वकील की इस दलील की अनसुनी कर दी कि लड़की नाबालिग है। कार्यदल ने कहा कि ऐसी मामलों पर अदालते निष्पक्ष रूप से विचार नहीं कर पाती क्योंकि अदालत कक्ष मजहबी नारेबाजी करने वालें कट्टरपंथी लोगों से भय रहता है।

DEVDAS ने कहा…

कांग्रेस हटाओ ! देश बचाओ !!
इस्लाम हटाओ ! दुनिया बचाओ !!

DEVDAS ने कहा…

सलीम मियां , हिमांशु गुप्ता के सवाल का क्या जवाब है आपके पास ??

Sujeet Singh ने कहा…

सलीम मिया ! तुमने मेरे कमेन्ट ही मिटा दिए ? क्या बात है कि तुम कमेन्ट को मिटा देते हो ? तुम्हे पसंद नहीं आया होगा ?
आएगा कहा से ?
तुम सिर्फ कुए के एक मेढक ही हो , पुरे दुनिया में झांक कर देखो तो दिखाई देगा कि जितने भी आतंकवादी है दिर्फ़ और सिर्फ मुसलमान ही है और कोई नहीं है |और कुए में सिर्फ देखोगे तो क्या दिखाई देगा ?
रही बात और सबो कि तो जानो " इस्लाम धर्म के नाम पर आतंक फैलाता है, धर्म कि लड़ाई लड़ता है जैसा कि कुरान में कहा गया है |नौजवानों को जन्नत के हूरों के सपने दिखा ब्रेन वाश करके आतंक फैलाता है, है कोई समाज कि ये लड़ाई ? नहीं है ना ?
और सब जो भी गिनती किये हो, उसमे और इस्लामी आतंकवाद में कोई समानता नहीं है |


गुल्लू मिया कमेन्ट ना मिटाया करो | गारा मिटाना है तो कमेन्ट आफ करदो |

किलर झपाटा ने कहा…

मियाँ एक बानगी ये भी देखिये

मदन शर्मा V/s जमाल
आदरणीय मदन शर्मा जी,
जमाल बाबू से आप बहस में ना जीत पायेंगे। कारण ये है कि जमाल जी हिन्दी ब्लॉगजगत में मूर्खता और बेवकूफ़ियों का सबसे बड़ा नगाड़ा हैं। और आप तो न नगाड़ेबाज हो न अखाड़ेबाज, मेरी तरह। ये महाशय सिर्फ़ नगाड़ेबाज और अखाड़ेबाज दो ही लोगों से घबराते हैं। मेरे ब्लॉग पर आप इनकी दीन हीन दशा हमेशा देख सकते हैं। वहीं पर ये अपनी टोपी सहित पट्ट पाये जाते हैं।
शर्मा जी आपको स्मरण कराता हूँ, आपने इनसे मिलती जुलती एकमात्र वस्तु इस असार संसार में देखी होगी। मालुम क्या ? ही ही

बिल्ली का गू ।
हा हा
जो ना लीपने का होता है ना ही पोतने का। एम आय राँग ?


लो जमाल जी लो धोबी पछाड़।
आप कहते हो:-
(@ Rajpurohit ji ! हनुमान जी को भगवान तो मेरे पूर्वज श्री रामचंद्र जी ने भी नहीं माना भाई .)

जवाब:-
रामजी, आप जैसे बेसिरपैर दिमाग वालों के पूर्वज कहाँ से हो गये ? आप या आपके पूर्वज कन्वर्टेड याने मार मार मुसलमान बनाये गये थे क्या ?
और सुनो जब राम ने कहा कि तुम मम प्रिय भरतहिं सम भाई तब ही वो भगवान हो गये क्योंकि भगवान का भाई भगवान अण्डर्स्टुड।
आपके यहाँ तो अल्ला मियाँ सण्ड मुसण्ड याने सिंगल माने जाते हैं शायद। अब जब उनकी खुद किसी से रिश्तेदारी नहीं तो बताइये आप से क्या होगी यू टोपीबाज मामूली इंसान ?
इसीलिये शायद अल्ला मियाँ से निराश होकर आप भगवान राम को अपना पूर्वज बतलाने लग पड़े हैं। हो जाता है अक्सर निराशा में ऐसा। मैं और मदन शर्मा जी आपका यह दुख समझ सकते हैं।

जमाल जी नं २,
आप कहते हो:-
(मदन शर्मा जी ! भगवान का जो अर्थ आप बता रहे हैं उसे आप संस्कृत के किसी शब्दकोष में तो दिखा नहीं सकते , आप जैसे लोग खुद ही किसी भी चीज़ को भगवान बना लेते हो और किसी भी शब्द का कुछ भी अर्थ घोषित कर देते हो. आपको अपनी बात के पक्ष में प्रमाण देना चाहिए. आपकी बात सही होगी तो मैं आपकी बात मान लूँगा.)

यार जमाल बाबू, आप शब्दकोष (लुगत) भी मुसलमानी मोहल्ले के मीना बाजार से खरीदते हो। वहाँ कहाँ मिलेगा इसका अर्थ। अरे जब सारी की सारी Earth ही आप जैसे व्यर्थ (टोपीबाज मुल्लों) जो दर‍असल यह छुपाने के लिये पहनी जाती है कि इस टोपी के नीचे कोई खोपड़ी (दिमाग) ही नही है) लोगों से भरी पड़ी हो तो तब ऊपरवाले पर बह्स करने का क्या अर्थ ?
हा हा और आपने जब अपने वालिद की बात नहीं मानी कि बेटा और कोई भले पैदा हो तो तू मत पैदा हो जाना, तब भी आप पैदा हो ही गये, तो शर्मा जी का दिया कोई भी प्रमाण क्या मानेंगे ?
ही ही।

जमाल बाबू नं ३
आप कहते हो:-
(@ मदन शर्मा जी ! आप संधि-विच्छेद करके जो अर्थ जबरन निकाल रहे हैं उसका आधार और स्रोत क्या है ?
किसी ग्रन्थ का हवाला तो दीजिये)


देखो जी, संधि-विच्छेद (खतना) के मास्टर तो आप ही लोग हो इसलिये इसका और स्रोत वही समझ लीजिये और रही बात ग्रन्थ की तो वो इस्लाम में होता है क्या ? आय डोण्ट थिंक सो।
हा हा

जमाल बेकाबू नं ४
आप कहते हो:-
(@ शर्मा जी ! आपके पास समय नहीं है तो हम तो आपको बुलाने नहीं गए थे . हमारे पास आये थे तो सोचकर आते कि अब वो ज़माने नहीं रहे कि जब लोग पंडत की बात इसलिए मान लेते थे कि पंडत जी कह रहे हैं . लोगों के इसी भोलेपन का फायदा उठाकर आपने जानवरों को इंसानों का भगवान घोषित कर दिया . घोर पाप किया पंडत जी आप जैसे लोगों ने.)

इसके जवाब में एक शेर ही काफ़ी है

शैख ने मस्जिद बना मिस्मार बुतखाना किया
तब तो एक सूरत भी थी अब साफ़ वीराना किया

जमाल बाबू नं ५
आप कहते हो:-
(विधवाओं की दुर्दशा के पीछे भी यही कारण है , जो कि इस पोस्ट का विषय है . लेकिन इस्लाम के प्रभाव में आकर विधवाओं की सोच काफी बदल गयी है. अब वे भी जीना चाहती हैं .
अगली बार जब आप आयें तो समय निकलकर और प्रमाण ढूंढ कर ज़रूर लायें)

सही कहा आपने इस्लाम के प्रभाव में आकर विधवाओं की सोच काफ़ी बदल गई है याने वो विधवा की जगह बेवा हो गई हैं है ना ?
आपकी वो मीना बाजार वाली लुगत में देखना जरा ?
हा हा।
और सुनिये लोग तो आप को ही समय से निकाल देने के मूड में हैं। अब मत पगलाओ डॉ. साहब, ऐसे में तबियत और फ़ितरत और किस्मत सब की सब बिगाड़ लोगे। आपका सबसे अजीज दोस्त हूँ तो इतना ही कहता हूँ कि मेरी टिप्पणियाँ मिटाने की जगह उन्हें दिल और मन लगाकर पढ़ डालो तुम्हारी जिंदगी तर जायेगी और ये नजर के पर्दों की धूल अपने आप झड़ जायेगी।
अपने नाम को भी उसी लुगत में देख लेना और फिर सोचना कि क्या तुम्हारे काम का भी वही अर्थ है जो तुम्हारे नाम का होना चाहिये ?
चलता हूँ।
बाय बाय भाय

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